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What is GST & who will get benefit and loss from this ?

जीएसटी GST (Goods and Service Tax)  जिसको हिंदी में वस्तु एंव सेवा कर कहते हैं, भारत के कर सुधार का एक बहुत बड़ा कदम है, जो कि १ जुलाई से आपकी जिन्दगी का अभिन्न हिस्सा बनने वाला है, आपके खाने से ले के आपके घर खरीदने तक सब कुछ GST से तय होने वाला है, GST लागू होने से पुरे भारत में एक ही तरह का कर लगेगा.

सरकार के अनुसार GST (Goods and Service Tax)= [ { CGST (Central Goods and Service Tax) + ( SGST (State Goods and Service Tax) OR ( IGST (State Goods and Service Tax) } ]

1. भारतीय कराधान प्रणाली में पहला सुधार (First reform of Indian taxation system –
ऊपर दिए गए कर formulas  को समझने से पहले हमें ये जानना जरुरी है कि – VAT ( Value Added Tax) यानी मूल्य वर्धित कर जो की द्वितीय भारतीय कर प्रणाली है जिसको 1 अप्रैल 2005 में लागू किया गया ये कर प्रणाली सामान्य ST (Service Tax)  सेवा कर का अग्रिम (Advance) रूप थी.

VAT(मूल्य वर्धित कर) कर प्रणाली में कुछ खामियां ये थी की इसमें CST यानी केंद्रीय बिक्री कर, Central Excise Duty यानी केंद्रीय उत्पाद शुल्क, और कुछ अतरिक्त कर जैसे लक्जरी आइटम्स टैक्स, मनोरंजन कर, इत्यादि कर इसमें शामिल नही थे .

2. भारतीय कराधान प्रणाली में दूसरा सुधार (Second reform of Indian taxation system) –
भारतीय कर प्रणाली में द्वतीय कर सुधार का नाम ही जीएसटी (GST) है, जो की सभी तरह के कर को कवर करता है, इस कर के तहत Central Excise Duty यानी केंद्रीय उत्पाद शुल्क, और कुछ अतरिक्त कर जैसे लक्जरी आइटम्स टैक्स, मनोरंजन कर, सभी को शामिल कर लिए गया है.

आइये अब ऊपर दिए गए कर GST formulas  को समझने का प्रयास करते है.
कर (TAX) जो की पहली पीढ़ी के (VAT) मूल्य वर्धित कर प्रणाली में लक्ज़री टैक्स, मनोरंजन कर को जोड़ा गया और नाम दिया गया (SGST) State Goods and Service Tax  इसके अलावा Central Sales Tax यानी केंद्रीय बिक्री कर, Central Excise Duty यानी केंद्रीय उत्पाद शुल्क, Additional Customs Duty यानि अतिरिक्त सीमा शुल्क ड्यूटी इत्यादी को एक साथ शामिल कर इनका नाम दिया गया CGST (Central Goods and Service Tax). अंतरराज्यीय या अंतरराज्यीय व्यापार के बावजूद केन्द्रीय सरकार के राजस्व में ही सीजीएसटी (CGST) जाएगा।

अंतर राज्य व्यापार (Inter-State Business) –
भारत में पहली पीढ़ी के वैट सिस्टम का सबसे ज्यादा नुकसान ये था ऑनलाइन बाजार के तहत अंतर राज्य व्यापार को हैंडल करने में विफल था, इसलिये केंद्रीय बिक्री कर (CST) जो कि कर को संदर्भित करता है इसको नाम दिया गया  Integrated Goods and Service Tax (IGST). अंतर-राज्य व्यापार के दौरान उत्पन्न बिक्री को गंतव्य सिद्धांत यानी destination principle के आधार पर लगाया जायेगा और अंतरराज्यीय व्यापार के दौरान SGST  आयात करने वाले राज्य को ट्रांसफर हो जायेगा जबकि केंद्र सरकार शुरू में कुछ वर्षों के लिए अतिरिक्त टैक्स एकत्र करेगी.

सेवा मूल्य (Services Value) –
इनपुट टैक्स क्रेडिट के अंतर्गत Trader/Manufacturer के लिए first generation VAT में कच्चे माल के लिए वैट भुगतान तक ही सीमित था, लेकिन जीएसटी प्रणाली का प्रमुख लाभ ये है की Trader/Manufacturer यानि (व्यापारी/उत्पादक) पहले से Pay किये गये TAX (कर) को Claim कर सकता है, Like that transportation (परिवहन), room rent (कमरे का किराया), manufacturing (विनिर्माण) इत्यादि…जो की फर्स्ट जनरेशन के वैट प्रणाली में मुमकिन नही था
वैट प्रणाली (VAT System) के मायाजाल जैसे सेवा कर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क आदि को जीएसटी (GST) के तहत लाने कारण उपरोक्त फायदा हुआ है।

GST (Goods and Service Tax) की कुछ प्रमुख बातें (important point of GST ) –

  • GST सिर्फ अप्रत्यक्ष करों पर ही लगेगा, प्रत्यक्ष कर जैसे income tax पर इसका कोई असर नही पड़ेगा.
  • GST (जीएसटी) लागू होते ही पुरे भारत में वस्तुओं और सेवाओं में एक तरह की ही कीमत हो जाएगी.
  • GST (जीएसटी) दो स्तर पर लगेगा, एक हिस्सा केंद्र सरकार लेगी वा दूसरा हिस्सा राज्य सर्कार के पास जायेगा, लेकिन अगर एक राज्य दुसरे राज्य को निर्यात करता है तो एक हिस्सा केंद्र और एक हिस्सा आयात करने वाला राज्य रखेगा.
  • GST के तहत उन सभी व्यवसायियों  को रजिस्टर होना होगा जो एक फिक्स अमाउंट के ऊपर कुल बिक्री करते है
  • GST के अंतर्गत तीन तरह के टैक्स भरने होंगे, CGST, SGST वा IGST

आम आदमी पर जीएसटी का प्रभाव – GST Effect on Common Man –

अगर बात करें टैक्स की तो टैक्स आखिर कार आम आदमी को ही भरना होता है .लेकिन GST के आ जाने से पारदर्शिता बढ़ जाएगी और हर स्टेट में एक जैसा टैक्स हो जायेगा यानि वस्तुओं और सेवाओं की कीमत एक जैसी हो जाएगी.
GST यानि Goods and Service Tax लागू हो जाने से CST (सीएसटी), GST में समाहित हो जयेगा और वस्तुओं के कीमतों में कमी आयेगी.

जीएसटी आने से क्या सस्ता होगा और क्या महंगा –What will cost more What will cost Cheap After GST –

आइये अब एक नजर में देखते है की GST के आने से किन चीजों में कमी आयेगीं और किन चीजों में तेजी.

जिन चीजों पर नहीं लगेगा जीएसटी ( Zero percent GST product) –
जीएसटी आने से घर में जरुरत होने वाली चीजों की कीमत घटेगी, जैसे – दूध, दही, पनीर, अनाज, मैदा, बेसन, अंडे, नमक, काजल, किताबें, दवाएं वा स्वास्थ्य सेवाएं, फल, शिक्षा वा बच्चों की रंगीन किताबें इत्यादि.

इन पर होगा 5 फीसदी GST (5 percent GST product) –
जीएसटी लागू होने के बाद कुछ चीजों पर 5% टैक्स लगेगा , जैसे चीनी चाय की पत्ती, कॉफ़ी, पैक्ड तेल, दूध पाउडर, पैक्ड पनीर, केरोसिन, घरेलू एलपीजी, जूते,चप्पल – 500 रूपये तक कपडे- 1000 रुपये तक, काजू, कोयला,अगरबत्ती, चटाई इत्यादि.

इन पर होगा 12 फीसदी GST (12 percent GST product) –
घी, ड्राई फ्रूट्स जूस, नारियल, फल, सब्जी, अचार, छाता, मोबाइल इत्यादि.

इन पर होगा 18 फीसदी GST ( 18 percent GST product) –
टूथपेस्ट, हेयर आयल, सोप, मिनिरल वाटर, टॉयलेट पेपर, नोटबुक, हेलमेट, आइसक्रीम, प्रिंटर,कंप्यूटर इत्यादि.

इन पर होगा 28 फीसदी GST ( 28 percent GST product) –
कार, मोटर साइकिल, चॉकलेट, फ्रिज, परफ़्यूम, मेकअप आइटम्स, वाल पेंट, शेविंग क्रीम, आफ्टर शेव, टायर, मार्बल, टेम्पर्ड  ग्लास, रेज़र, गन इत्यादि.

जीएसटी से क्या घर खरीदना होगा महंगा ? (Will GST make home purchase Expensive) ? –

1 जुलाई से GST लागू होने के बाद जो भी प्रोजेक्ट अंडर कंस्ट्रक्शन हैं, उन पर अब 12% GST रेट होगा जो की पहले 4.5%  था, स्टील भी 18 % टैक्स व सीमेंट 28% टैक्स के साथ जो की पहले 23% -24% थी कंस्ट्रक्शन की कीमत में इजाफा करेगी , CREDAI मेंबर और Director Of Carol Infrastructure Pvt. Ltd. Mr. Manu Garg का कहना है की जीएसटी लागू होने से प्रॉपर्टी मार्केट पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ेगा, और अगर एनसीआर में ग़ाज़ियाबाद प्रॉपर्टी (Property in Ghaziabad) की बात करें तो इसके रेट भी बढ़ सकते हैं, GST (Goods and Service Tax) & RERA (Real Estate Regulatory Authority) के आने से 10 से 20 % तक रेट बढ़ सकते हैं. अभी सही समय है प्रॉपर्टी खरीदने का, आने वाले कुछ टाइम में प्रॉपर्टी के रेट बढेंगे,क्यूंकि कंस्ट्रक्शन की कीमत बढ़ जाएगी. वो ये सब CREDAI (Confederation of Real Estate Developers’ Associations of India) की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला.

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